उत्तर प्रदेशबस्ती

‘बीएसए’ के बाबू विमल “त्रिपाठी” ठगबाज निकले; नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवक से छह लाख रुपये ठगने का सनसनीखेज मामला

18 लाख का सौदा: आरोपी त्रिपाठी ने खुद को शिक्षा विभाग में कई लोगों की नौकरी लगवाने वाला व्यक्ति बताते हुए शिकायतकर्ता से कुल 18 लाख रुपये की मांग की, जिसमें से 6 लाख रुपये पहले देने की शर्त रखी गई थी।

अजीत मिश्रा (खोजी)

‘बीएसए’ के बाबू विमल त्रिपाठी निकले ठगबाज: नौकरी के नाम पर छह लाख ठगने का सनसनीखेज खुलासा

  • आरोपी बाबू के खिलाफ कोतवाली थाने में धोखाधड़ी और धमकी देने का मुकदमा दर्ज
  • ​बीएसए कार्यालय परिसर में दो गवाहों की मौजूदगी में दिए गए थे छह लाख रुपये नकद
  • ​अपर्याप्त धनराशि के कारण आरोपी का चेक हुआ बाउंस, संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय में तैनाती का धौंस देकर दी धमकी
  • ​सीओ सिटी की जांच रिपोर्ट के बाद 23 जुलाई को दर्ज हुआ मुकदमा, एसआई राम कुमार यादव को सौंपी गई विवेचना

बस्ती: शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले सरकारी कार्यालय किस प्रकार दलालों और भ्रष्टाचार के अड्डे बन चुके हैं, इसका एक और जीवंत उदाहरण बस्ती से सामने आया है। कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय में तैनात बाबू विमल कुमार त्रिपाठी पर एक बेरोजगार युवक से नौकरी दिलाने के नाम पर 6 लाख रुपये ठगने का गंभीर आरोप लगा है। पुलिस ने आरोपी बाबू के खिलाफ धोखाधड़ी और धमकी देने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

क्या है पूरा मामला?

​जिगिना निवासी विनोद कुमार शुक्ला (पुत्र स्व. कृष्ण प्रसाद शुक्ला) ने पुलिस अधीक्षक को दिए प्रार्थना पत्र में पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है:

  • भेंट और मांग: बेरोजगार विनोद कुमार की मुलाकात बीएसए कार्यालय में तैनात बाबू विमल कुमार त्रिपाठी से हुई। आरोपी ने खुद को शिक्षा विभाग में कई लोगों की नौकरी लगवाने वाला शातिर ठग बताते हुए कुल 18 लाख रुपये की मांग की, जिसमें 6 लाख रुपये पहले एडवांस देने की शर्त रखी गई थी।
  • रुपयों का इंतजाम और भुगतान: पीड़ित ने रिश्तेदारों व शुभचिंतकों से कर्ज लेकर व्यवस्था की और 18 नवंबर 2016 को दो गवाहों की मौजूदगी में बीएसए कार्यालय परिसर में ही आरोपी को 6 लाख रुपये नकद सौंप दिए।
  • टालमटोल और फर्जी चेक: पैसे लेने के बाद न तो नौकरी लगी और न ही रकम वापस मिली। आरोपी व्हाट्सएप पर संदेश भेजकर लगातार झूठा आश्वासन देता रहा। दबाव बनाने पर उसने एचडीएफसी बैंक का एक चेक दिया, जो खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण बाउंस हो गया।

दबंगई और धमकियां: “मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता”

​जब पीड़ित ने बाउंस हुए चेक और ठगी को लेकर सवाल उठाया, तो आरोपी बाबू के तेवर और खतरनाक हो गए। उसने खुलेआम धमकी दी कि वह अब संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय में तैनात हो चुका है और शिकायतकर्ता उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। स्थानीय थाने पर सूचना देने के बावजूद जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तब पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक, बस्ती का दरवाजा खटखटाया।

पुलिसिया कार्रवाई और बड़ी साजिश का अंदेशा

​सीओ सिटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर 23 जुलाई को कोतवाली थाने में मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है, और मामले की विवेचना उप निरीक्षक राम कुमार यादव को सौंपी गई है।

​यह मामला केवल एक बाबू की व्यक्तिगत धोखाधड़ी का नहीं, बल्कि उस गहरे और भ्रष्ट तंत्र की ओर इशारा करता है जहाँ शिक्षा के मंदिरों में बेरोजगारों के सपनों की खुलेआम नीलामियां हो रही हैं। क्या यह इतना बड़ा खेल एक अकेला बाबू खेल रहा था या इसके पीछे बैठे अन्य सफेदपोशों और अधिकारियों के संरक्षण का भी हाथ है? यह उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच का विषय है, ताकि बेकसूर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले इस गिरोह की जड़ें काटी जा सकें।

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